लड़की का दिल चुंबक सा लड़के की ओर खींचा चला जा रहा था | लड़की ने अपने दिल को पतंग की उस डोर जैसे थाम रखा, जिसके छुटते ही जिंदगी की डोर किसी और के हाथ में चली जाती है | लड़की दिल को खूब समझाती कि लड़का उसका हो नहीं सकता | लेकिन दिल ने तो जैसे ठान ही लिया था कि वो या तो दो दिलों को मिलवा देगा या फिर द ग्रेट वाॅल आॅफ चाइना जैसी दीवार खड़ी कर देगा | लड़की ने बेजोड़ कोशिश कि लेकिन ये दिल की पतंंग उसके बस में नहीं थी और एक दिन उसके हाथ से छूट ही गई | लड़की कबूल कर बैठी कि उसे मोहब्बत है | पर लड़की के दिल की पतंग कटकर गलत छत पर जा गिरी थी | लड़के के दिल में लड़की के लिए कुछ न था | लड़की को जब तक इस बात का आभास होता तब तक बहुत देर हो चुकी थी | अब तक तो लड़की ने कबूलनामा भी पढ लिया था और अपनी जिंदगी की हर पतंग की डोर लड़के के नाम कर आसमान में लहरा रही थी | लड़के की समझ में नही आ रहा था कि वो इस पगली को कैसे समझाये कि ये पतंगबाजी नहीं जिंदगी का खेल और ऐसे ही किसी को अपनी डोर नहीं थमाई जाती | लड़के ने लड़की को समझाने की लाख कोशिश की, लेकिन इसी चक्कर में उसकी भी पतंग कट गई | लड़की ने आखिरकार यहां भी बाजी मार ली | लड़की को समझाने के चक्कर में लड़के की कन्नी कट गई और फिर लड़की ने ऐसा मांजा लपेटा कि आज लड़का-लड़की दो बच्चों की गृहस्थी के साथ माता-पिता में तब्दील हो गए है |

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