छत पर कंबल की ओट में गर्दन से पैर तक छिपा सोनू नीले आसमान की तरफ एकटक तांक रहा था | आज चांद अपने साथ सितारों की ऐसी बहार लाया था कि जान पड़ता था आसमान में किसी की शादी हो रही हो | सोनू अब तक कई बार लगभग सारे तारे गिन चुका था, लेकिन हर बार उसे ऐसा लगता था कि एकाध तारा छूट गया है | ये सिलसिला जारी ही था कि इतने में अम्मा छत पर आई और पूछा, 'क्या हुआ बेटा, कहां खोये हो? देख रही हूं बड़ी देर से आसमान में तांकाझांकी कर रहे हो ! बात क्या है?' सोनू ने मां का आंचल थामा और जगह बनाकर लेट गया | मां की मंद मुस्कान को निहारते हुए बोला, 'अरे मेरी मां, मैं तो बस आज ये उपर जमी महफिल देख रहा हूं ! देखो तो कैसे तारों की भीड़ लगी है ! सब तारे आज नहाकर आये है लगता है, तभी तो ऐसे चमक रहे है ! अच्छा मां बताओ ना इनसे से बाबा कौनसे है?' एक पल को तो सोनू की मां शून्यमुद्रा में चली गई | फिर जल्दी से अपने दिल को संभाला और बोली, 'लो भला ये भी कोई पूछने कि बात है ! जो सबसे सुंदर और चमकीला है वही तो तुम्हारे बाबा है ! हमेशा की तरह सबसे पाक, सबसे साफ ! सबसे अलग, सबसे अनोखे !' मां की बातें सुन सोनू झटके से उठ गया और बोला, 'अरे मां, फिर तो बाबा वो बड़े वाले चांद है ! देखो तो कैसे वहां भी अपनी हूकूमत चला रहे है ! जैसे यहां चलाते थे !' सोनू के शब्द सुनकर मां भावविभोर हो उठी और सोनू बाबा की पहचान वाले चांद को पाकर रोमांचित !

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