About Me

My photo
नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Wednesday, 25 May 2016

लघुकथा :- दी एंड

लड़की ने बहुत दिनों बाद आज काम से थोड़ी फुर्सत ली थी | जिंदगी इतनी व्यस्त थी कि उसे किसी चीज का अहसास ही ना था कि आखिर दुनिया में चल क्या रहा है | उसने अपनी सहेली को फोन कर मिलने बुलाया | दोनों घंटे भर कॅाफी टेबल पर बैठे एक दूसरे को निहारते रहे | लड़की की सहेली से रहा ना गया और वो बोली,"तू कब तक ऐसी मनहूसियत भरी शक्ल लेकर घूमेगी ! देख अपनी हालत ! ऐसी तो तू ना थी ! हो क्या गया है तूझे ! तू ही कहती थी ना कि जो हमारी कद्र नहीं करता, उनके बारे में हमें नहीं सोचना चाहिए ! फिर क्यों? तू भूल क्यों नहीं जाती उसे? सुन, तू एक काम कर उसे एक बार कॅाल कर ! अरे पूछ तो ले कमबख्त से कि आखिर हुआ क्या? क्या पता उसकी शादी टूट गई हो ! क्या पता उनकी ना जमी हो ! कम से कम पूछ तो ले यार !" लड़की ने सहेली की बात मानी और दिल पर पत्थर रखकर लड़के को कॅाल लगाया | लड़के ने लड़की का कॅाल ब्लॅाक कर रखा था | अब लड़की के भीतर फिर वही ज्वालामुखी फूट पड़ा | अपनी सहेली से तमतमाकर बोली, "तू ठीक कहती है जो हमारी इज्जत ना करें, उनके बारे में हमें भी नहीं सोचना चाहिए ! बस अब बहुत हुआ ! आज तेरी कसम खा कर कहती हूं, ये मनहूसियत यही इसी कॅाफी टेबल पर छोड़ कर जा रही हूं ! आज के बाद नो मोर मनहूसियत....फाइनली दी एंड......!!!!"

No comments: