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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Wednesday, 25 May 2016

लघुकथा :- लाल दुपट्टा

लड़की बहुत दिनों से सोच रही थी कि एक लाल दुपट्टा ख़रीदे। आजकल जीन्स पैंट के जमाने में उसे अजीब सा खुमार चढ़ा था लाल दुपट्टा ओढ़ने का। कालेज जाते वक़्त जब भी मार्केट से गुजरती, तो दुपट्टे की दूकान को ऐसे ताकती। जैसे उस दूकान में कोई जादू हो। लड़की लड़के से भी बातचीत के दौरान कई दफा दुपट्टे का जिक्र कर चुकी थी। अब ये लाल दुपट्टा ना सिर्फ लड़की का ख्वाब था, बल्कि लडके का मिशन भी बन चूका था। लड़का हर हाल में लड़की को खुश करना चाहता था और उसने सब जुगाड़ लगा लिया था। और जब इस महीने वैलेंटाइन्स डे आया, तो लड़का गुलदस्ते और चॉकलेट के बजाय कई कैरी बैग्स के साथ लड़की से मिलने आया। लड़की ने पूछा आखिर इसमें है क्या? और लड़के ने एक इत्मीनान भरी मुस्कान के साथ कहा, "तुम्हारा लाल दुपट्टा, देश भर में मेरे जितने रिश्तेदार अलग अलग शहरो में रहते है, उन सबसे वहां के मशहूर दुपट्टा हाउस से लाल दुपट्टा मंगवाया है। अब एक नहीं 55 लाल दुपट्टे है। ओढ़ो जितना ओढ़ना है और करलो अपनी ख्वाहिश पूरी, आई लव यू" लड़के के इस सरप्राइज से लड़की स्तब्ध रह गई।   

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