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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Wednesday, 25 May 2016

लघुकथा :- चंठ

लोग कहते थे वो बड़ी चंठ थी। जब कभी मोहल्ले से निकलती, तो लोग उसकी आहट भर से ही सकपका जाते। पहले लोग उसे बड़े हल्के में लेते थे। दो बच्चों के साथ अकेली महिला हर किसी के लिए चर्चा का विषय थी। लेकिन आज सभी उसके नारी शक्ति की मिसाल देते थे। महिला होने के बावजूद भी वो बहुत सशक्त थी। कई पुरुषनुमा प्राणियों को ये बात रास न आती। कहना तो बहुत कुछ चाहते थे, लेकिन उसी के कारन आज पूरा मोहल्ला चैन की नींद सो रहा था। दरअसल कुछ समय पहले इस पुरे मोहल्ले में कुछ स्थानीय गुंडों का दबदबा था। लोग बीते कई समय से ये गुंडागर्दी सह रहे थे। लेकिन कभी किसी के हलक से आवाज़ ना निकलती। एक दिन जब बात इस महिला की आबरू पर आ बनी, तब महिला ने अपने भीतर की अंतरात्मा को आवाज़ लगाई और चंडी का रूप धारण कर लिया। एक ही बार में महिला ने तीन जीवन लीला समाप्त कर दी और अपनी आबरू बचाने के लिए तीन गुंडों का क़त्ल कर दिया। सिर्फ एक कदम.....और आज महिला की आबरू पर किसी गैर पुरुष की नज़र भी नहीं है और इलाके में शांति भी बनी है।

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