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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Monday, 11 April 2016

लघुकथा :- किसी और की खातिर

लड़की ने झुंझलाते हुए कहा, 'देख लेना एक दिन धोखा खाओगे और फिर मेरे पास ना आना कंधा मांगने| मैं अब अपना कंधा तुम्हे नहीं दूंगी और वो भी किसी और की खातिर आंसू बहाने के लिए तो बिल्कुल नहीं...!' लड़का सोच में था आखिर इस पागल को हो क्या गया है | क्यूं इतना चीख रही है | लड़के ने उसे शांत कराते हुए कहा, 'अरे यार, इतना क्यूं बावली हो रही है तू? और कुछ हुआ भी तो मेरे साथ होगा ना और मुझे पता है रिया अच्छी लड़की है, मुझे कभी धोखा नहीं देगी |' लड़की ने आंसू पोछा | लड़के से अपना हाथ छुड़ाया और आज पहली बार थूक का गोला गले से निगलते हुए हिम्मत भरी सांस ली और कहा, 'दुनिया भर की लड़की तुम्हे सही लगती है और जो तुम्हारे लिए सही है वो तुम्हे नजर नहीं आती | आज सीधे सीधे कह रही हूं प्यार करती हूं तुमसे और अब ये सब और नहीं देख सकती | मंजूर है तो शाम को फोन करना, मैं इंतजार करूंगी, वरना आज आखिरी बार तुम्हारा चेहरा देख कर लौट जाउंगी |' लड़की ने नो बॉल पर ऐसा सिक्सर मारा था कि लड़का अब पूरी तरह से स्टेडियम सेे बाहर था |

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