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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Monday, 11 April 2016

लघुकथा :- कॉफी का कप

कॉफी की कप हाथ में लिए लड़की बॉलकनी में खड़ी खड़ी कुछ सोच रही थी | नीचे देखा तो एक जोड़ा हाथों में हाथ डाले बैठा बतिया रहा था | लड़की कॉफी की झाग को चम्मच से हिलाते हुए झागों के साइक्लोन के साथ अपनी दुनिया में खो गई | उसे याद आने लगा हर एक वो पल जब वो लड़के के साथ होती थी | किस तरह लड़का उसका ख्याल रखता था | सड़क पार करते वक्त उसकी हथेली थाम लेता था | बारिश में लड़की को खुद से पूरी तरह ढक लेता था | जब लड़की उदास होती, तो लड़का उसे तरह तरह के गाने सुनाता था | यादों का पिटारा ऐसा खुला कि लड़की बस उसमें गुम ही हो गई | अचानक फोन की घंटी बजी और लड़की यादों की दुनिया से झटके से वापस आ लौटी | लेकिन जब तक वो संभलती, कॉफी का कप हाथ से नीचे छूट चुका था और उसने जब नीचे झांककर देखा, तो कॉफी की बूंदे उसकी यादों की ही तरह नीचे बिखरी पड़ी थी | साथ ही नीचे बैठा लड़का लड़की के हाथों पर गिरे कॉफी के छीटों को बड़े प्यार से साफ कर रहा था | लड़की ने उन दोनों की ओर देखा और कान पकड़कर सॉरी का इशारा किया | लड़के ने जोर से कहा, 'कोई बात नहीं...उल्टे आपने हमें करीब आने का मौका दे दिया smile emoticon' लड़की ने सुकुनभरी मुस्कुराहट दी और इसी के साथ फोन उठाने चली गई |

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