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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Monday, 11 April 2016

लघुकथा :- लुकाछिपी

लड़की ऑफिस की मीटिंग में ठीक लड़के के समानांतर बैठी थी | मीटींग के दौरान जब जब लड़की देखती, तब तब लड़का पलकें झुका लेता और जब लड़का देखता तब लड़की शर्मा जाती | पूरे मीटिंग के दौरान यही चलता रहा और जब मीटिंग खत्म हुई, तो लड़के ने मौका पाते ही लड़की से कहा, 'मैंने तुम्हारी कहानियां पढी है, अच्छा लिखती हो तुम |' लड़की ने आत्मविश्वास से पूर्ण एक स्माइल दी और कहा, 'जी शुक्रिया...वैसे मैंने भी आपकी प्रोफाइल देखी है अच्छा शेरो-शायरी कर लेते हो आप ! दिल का मामला गंभीर लगता है wink emoticon' लड़का भांप गया और बोला, 'बस ऐसे ही दिल लगा बैठे थे...अब दिलों से खेलना है बंद कर दिया है |' लड़की ने मौका पाते ही लड़के पर वार किया और कहा, 'हम दिलो से तो नहीं खेलते, हां थोड़ा शब्दों से जरूर खेल लेते है |' लड़की के इस वन लाइनर ने लड़के को वही कॉन्फ्रेंस हॉल में क्लीन बोल्ड कर दिया |

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