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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Monday, 11 April 2016

लघुकथा :- क्लीनबोल्ड

'अच्छा तो तुम न्यूज रिर्पोटर हो?' लड़के ने बड़ी असहजता से पूछा | लड़की ने धीमे से कहा, 'हां जी, मैं न्यूज रिर्पोटर हूं|' लड़के ने टेबल पर रखी कॉफी उठाई और फिर दुबारा बड़ी बेरुखी से पूछा, 'घर कब तक लौट आती हो?' ये सवाल सुनकर लड़की और उसकी टेबल के ठीक पीछे बैठे लड़के और लड़की के घरवाले खामोश हो गए | लड़की ने गहरी सांस ली और कहा, 'ये तो स्टोरी पर निर्भर करता है|' लड़का उठा और अपने मां-बाप से चलने को कह दिया | लड़की को बात कुछ हजम नहीं हुई | उसने सोचा आखिर किसी के घर लौटने के समय से उसका और उसके व्यक्तित्व का आंकलन कैसे किया जा सकता है | खैर सब मन मसोस कर रह गए | कुछ समय बीता | लड़का अपने नए परिवार के साथ टीवी देख रहा था | लड़की आज सुबह से लाइव रिर्पोटिंग कर रही थी | लड़के की पत्नी ने कहा, 'कितना जिगरा होता है ना ऐसी लड़कियों में | बिना डर के बिना किसी चीज की परवाह किए बस अपने काम में लीन होती है | जहां हादसे होते है वहां से लोग भागते है और ये न्यूजवाले वहां पहुंच जाते है | सलाम है इन्हें |" पत्नी की बातें सुनकर लड़के के मुंह से एक शब्द न फूटा | भीतर ही भीतर लड़के पर एक बड़ा वार हुआ था | सिवाय चैनल बदलने के उसके पास और कोई चारा न था |


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