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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Monday, 11 April 2016

लघुकथा :- बंधन

लड़का बाबला सा था पर थोड़ा गहरा सा और लड़की कभी सयानी तो कभी सबकी नानी होती थी | दोनों अलग अलग तरह के प्राणी थे | पर ना जाने क्यूं दोनों में जमती भी बहुत थी | लड़के का प्यार पर से पहले ही विश्वास उठ चुका था और लड़की प्यार शब्द से कोसो दूर | एक दिन लड़की ने लड़के से पूछा, 'अच्छा बताओ प्यार कैसे इंसान से करना चाहिए?' लड़का पहले तो अकचकाया, फिर बोला, 'मेरी मानो तो प्यार करना ही नहीं चाहिए...प्यार व्यार कुछ नहीं होता ! सब मोह माया है |' लड़की को लगा ये कैसी अजीब बातें करता है | लड़के ने फिर कहा, 'पर तुमने ऐसे क्यूं पूछा कि कैसे इंसान से प्यार करना चाहिए | प्यार तो किसी से भी हो सकता है |' लड़की को लड़के के इन्हीं शब्दों में अपनी पहली जीत मिल गई | लड़की मुस्काई और बोली, 'मैं तो चाहती हूं कि मैं जिससे प्यार करुं, उसका दिल पहले से टूटा हो...अगर दिल टूटा होगा, तो ही वो दुबारा किसी का दिल नहीं तोड़ेगा और मुझे और मेरे प्यार की अहमियत को समझेगा !' लड़की की इस बात से इस बार बिना कुछ कहे और किए लड़के की जीत हो गई |


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