आजकल दिल बहलता नही, मचलता नही, छटपटाता भी नहीं। ना जाने कौनसी सनक पकड़ रखी है इस दिल ने। काम के समय बडा मन लगाकर काम करता है, लेकिन जैसे ही काम खत्म, ये गली के उस कुत्ते की तरह शांत हो जाता है। जिसे हरदम किसी के द्वारा पीटे जाने का भय सताता रहता है।
बाहर से मैं जवान हूँ, लेकिन दिल ना जाने क्यों आजकल बूढ़ा सा प्रतीत होता है। दिल की आबोहवा बदल सी गयी है। किसी मशीन सा हो गया है मुआ। मुझे तो हर वक़्त अब ये डर सताता है कि ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही ये काम करना भी बंद कर देगा।
मेरी उम्र की लड़कियों को जब प्यार,इश्क़ और मोहब्बत के तराने छेड़ती देखती हूँ, तो खुद पर तरस आता है। दिल करता है या तो दिल लगा बैठू या फिर सब बर्बाद कर दूँ। पता नही मैं ये सब लिख भी क्यूँ रही हूँ। मुझे मालूम है ना आपको इसे पढ़ने में कोई दिलचस्पी है और नाही इससे कोई लेनादेना।
लेकिन फिर भी आप मेरी तरह इसे महसूस किये जा रहे हो और आगे आगे पढ़ते जा रहे है और जानने की कोशिश में लगे हो की भला इस लड़की के भीतर आखिर चल क्या रहा है। खैर, क्या चल रहा है मेरे भीतर? ये तो मुझे भी नही मालूम।
कई बार सोचती हूँ एक केस कर दूँ। सरकार से जवाब मांगू कि जब किसी नवयुवक/नवयुविका का दिल बेहाल हो, तो सरकार क्या करेगी? कितने लाख का मुआवजा देगी? कितनी रैलियां निकालेगी? या फिर दिल के दर्द का इलाज ढूंढने के लिए कौनसा नया बिल पास करेगी? राहुल गांधी कितने गरीबोें के घर जाएंगे? अरविन्द केजरीवाल कितनी बार स्याही खाएंगे? और मोदीजी मेरे बूढ़े दिल पर कितने आंसू बहायेंगे?
दिल तो ये भी करता है कि अपने बूढ़े दिल को किसी ओझा बाबा को दे आऊं, जिससे की वो ये पता लगा पाये कि आखिर कही कोई पिछले जन्म का राज, कोई टोना-टोटका, कोई मायाजाल या कोई ऐसी वैसी बात तो नही। आखिर दिल का भी तो वशीकरण किया जाता है और फिर मेरे दिल के बूढ़ेपन में भी मुझे घपला नज़र आता है।
मेरा दिल बच्चा नही, कच्चा नही। बिलकुल साफ़ और सच्चा है। बस आजकल थोड़ा सुस्त है लेकिन तंदरुस्त है। अब आगे ये देखना है कि इस बूढ़ेपन का इलाज कब, कहां, कैसे और किस शक्ल में होता है। फ़िलहाल के लिए शब्बा खैर, सलाम, प्राणाम और जिन्दा रहिये जब तक है जान।

4 comments:
wah diljale
wah diljale
मोहतरमा आदाब, जो हाल आपका है न, उसको सीधे महत्वाकांक्षा कहा जाता है। थोड़ा ग़म खाइए, मां पिताजी के साथ वक्त बिताइए। गौर से देखेंगी तो लड़के बहुतेरे हैं गुनी। कसम कलकत्ते की, किसी न किसी से मोहब्बत भी हो ही जाएगी। जय राम जी की.
@manjit Thakur : जनाब ! कोशिश निरंतर जारी है :)
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