सोचा था वक्त के साथ
तेरी फितरत भी बदल जायेगी !
रंजिशें कम होकर
तेरी नफरत में गिरावट आयेगी !
नामालूम था मुमकिन है ये
तेरी मोहब्बत भी इक रोज़ यूं बदल जायेगी !
गुनाह-ए-आशिकी में हमें
एक दिन ठोकर लग जाएगी !
इस दिल के खंडहर में
कभी मुस्कुराहट भी आयेगी !
बुझते चिरागों से जलती मोहब्बत देखकर,
क्या पता था मेरी रूह भी कांप जायेगी !
गुजर जायेगा ये ज़ालिम दौर भी कभी ना कभी
घुप्प अंधेरे के बाद नई सुबह भी आयेगी !
इश्क में ऐब है ढेरों ऐ दोस्त
नामालूम था तुझसे यूं कभी शिकायत भी आयेगी !
तेरे इश्क ने हमें बहुत कुछ दिया
कभी मगरूर, कभी बेजुबां
तो कभी वफा की काबिलियत भी सिखलायी !
दिल के मलबे को जब टटोलकर देखा
तो तेरी यादों के पिटारे से
पूरी जन्नत नजर आई !
फ्रिक न तब थी, न अब है
तू लाख सितम ढाए जा
तेरी मोहब्बत में मुझे तो बस
बरकत ही बरकत नज़र आयी !
- शिवांगी ठाकुर
तेरी फितरत भी बदल जायेगी !
रंजिशें कम होकर
तेरी नफरत में गिरावट आयेगी !
नामालूम था मुमकिन है ये
तेरी मोहब्बत भी इक रोज़ यूं बदल जायेगी !
गुनाह-ए-आशिकी में हमें
एक दिन ठोकर लग जाएगी !
इस दिल के खंडहर में
कभी मुस्कुराहट भी आयेगी !
बुझते चिरागों से जलती मोहब्बत देखकर,
क्या पता था मेरी रूह भी कांप जायेगी !
गुजर जायेगा ये ज़ालिम दौर भी कभी ना कभी
घुप्प अंधेरे के बाद नई सुबह भी आयेगी !
इश्क में ऐब है ढेरों ऐ दोस्त
नामालूम था तुझसे यूं कभी शिकायत भी आयेगी !
तेरे इश्क ने हमें बहुत कुछ दिया
कभी मगरूर, कभी बेजुबां
तो कभी वफा की काबिलियत भी सिखलायी !
दिल के मलबे को जब टटोलकर देखा
तो तेरी यादों के पिटारे से
पूरी जन्नत नजर आई !
फ्रिक न तब थी, न अब है
तू लाख सितम ढाए जा
तेरी मोहब्बत में मुझे तो बस
बरकत ही बरकत नज़र आयी !
- शिवांगी ठाकुर

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