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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Wednesday, 2 July 2014

"उनकी अधूरी कहानी"

"उनकी अधूरी कहानी"

"शालिनी, तुम उस स्मोकर से दूर रहा करो!" रुकैया ने कैंटीन में चाय की प्याली हाथ में लिए कहा! शालिनी ने कॉफ़ी की एक शिप ली, और रुकैया से कहा,' रुकी, देख मैं तो बस उसकी दोस्त हूँ ना, और किसी से दोस्ती करने में क्या बुराई है भला? वह दुनिया के लिए कैसा भी हो, हू केयर्स, मेरे साथ तो अच्छा ही बिहेव करता है ना! फिर कोई भी एक रीज़न दे, जिससे मैं उससे दोस्ती छोड़ दू, तुम सारे ऑफिस वालो को हो क्या गया है? जिसे देखो वो चला आता है मंजीत की बुराई करने! उसके सामने कोई कुछ क्यूँ नहीं कहता!" रुकैया ने चाय की प्याली टेबल पर पटकी और उठ खड़ी हुई! अपना पर्स उठाते हुए उसने शालिनी से कहा, ' देख शालू, मैं तेरी दुश्मन नहीं हूँ, मुझे लगा तुझे रोकना चाहिए, इसलिए कहा! अगर तुझे बुरा लगा हो तो आय ऍम एक्सट्रीमली सॉरी, चल बाय!"
रुकैया कैंटीन से बाहर निकल आई, पर शालिनी अब भी उधेड़बुन में थी! आखिर रुकैया ने ऐसा क्यूँ कहा? उसे तो मंजीत में कोई ऐब नज़र नहीं आता, सिवाय सिगरेट के! और मर्द है, वो स्मोक तो करेगा ही ना! मीडिया जैसी फील्ड, जहां ना खाने का ठिकाना न सोने का! स्मोक इतना बड़ा रीजन नहीं हो सकता उसे छोड़ने का! विचारों में खोयी हुई शालिनी ने दूसरी कॉफ़ी मंगवाई! इतने में मोबाइल पर मंजीत का मेसेज आया, ' वेर आर यू ?' शालिनी ने उसे फोन कर कैंटीन में आने को कहा!
कैंटीन में शालिनी की तीसरी और मंजीत की पहली कॉफ़ी चल रही थी! शालिनी शांत थी, अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मंजीत को निहारे जा रही थी, मानो अपने मन में गाना गा रही हो, ' मार दिया जाए, या छोड़ दिया जाए? बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया जाए?!' मंजीत ने भी शालिनी के आँखों को पढ़ने की कला सीख ली थी! उसके मन में भी एक गाना चल रहा था,' आँखों की गुस्ताखियां माफ़ हो!'
इस चुप्पी का क़त्ल आखिरकार मंजीत ने ही किया! शालिनी की आँखों में आँखें डाल, उससे पूछा, ' ओए मेरी दिल्ली, क्या हुआ है तुम्हे? कुछ कहती क्यों नहीं हो?' शालिनी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा, 'तुम्हारी दिल्ली परेशान हैं? यूं लोगों का तुम्हे नापसंद करना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है!'
मंजीत ने शालिनी का हाथ थामा और कहा, 'रिलैक्स यार!'

शालिनी और मंजीत एक दूसरे को तब से जानते है, जबसे शालिनी ने मंजीत का चैनल ज्वाइन किया था! मंजीत इस चैनल में पिछले तीन साल से कार्यरत है! मंजीत सीनियर था और शालिनी जूनियर! चुनावों का दौर चल रहा था इस समय! इसलिए मंजीत पॉलिटिकल बीट संभाल रहा था और तबियत थोड़ी खराब होने के कारण शालिनी आजकल डेस्क पर थी!
शालिनी ने पहली बार मंजीत को तब देखा था! जब वह कर्नाटक से बाढ़ पीड़ितो की रिपोर्टिंग कर वापस लौटा था! मंजीत के बारे में तो उसने ऑफिस ज्वाइन करते वक़्त ही सुन रखा था! पर जब उसे पहली बार देखा तो शालिनी को कुछ अलग महसूस हुआ! शालिनी की बड़ी बड़ी आँखे अक्सर लोगो को पढ़ लेती थी, पर मंजीत में जरुर कुछ ख़ास था, जिसे पढ़ना उससे लिए बेहद मुश्किल था! शालिनी भी.…थी तो बला की खूबसूरत! प्रोग्राम हेड तो उस पर लट्टू था, उसने तो शुरु में ही शालिनी को एंकरिंग करने का ऑफर थमा दिया था! पर शालिनी को रिपोर्टिंग पसंद थी, उसे फील्ड वर्क करना था! घटना का आंखोंदेखी सामना करना था! पर प्रोग्राम हेड बड़ा ही ठीठ था, उसने शुरू के तीन महीने शालिनी को कभी फील्ड पर नहीं भेजा, कई बार ऐसे मौके आये जब रिपोर्टर नहीं होते थे, फिर भी उसने शालिनी को फील्ड पर जाने की इज़ाज़त नहीं दी! उसे आज भी वो दिन याद है, जब मुम्बई के लोकल ट्रेन के डब्बो में बॉम ब्लास्ट हुए थे! और मंजीत के कहने पर ही प्रोग्राम हेड ने उसे वहाँ रिपोर्टिंग करने की इज़ाज़त दी थी, पर शर्त ये रखी थी, कि मंजीत भी उसके साथ जायेगा!
शालिनी ने मंजीत के बारे बहुतो के मुँह से बहुत कुछ सुन रखा था, आज वक़्त आ गया था, मंजीत को थोडा और करीब से जानने का!
मंजीत ने आनन फानन में ड्राईवर और कैमरामैन को बुलवाया! ओ. बी. वैन तैयार की और घटनास्थल की ओर निकल पड़ा! वैन अपनी रफ़्तार पर थी! कैमरामैन और ड्राईवर आपस में आगे बैठे बातें कर रहे थे! मंजीत और शालिनी गाड़ी की पिछली सीट पर थे! शालिनी सोच रही थी, अब मंजीत उससे कुछ डिस्कस करेगा रिपोर्टिंग के बारे में! पर मंजीत का मौन व्रत जारी था! शालिनी खुद को कोस रही थी, सोच रही थी ना जाने किस अकड़ू के साथ आ गई है वो!!
कार की रफ्तार मंजीत की वजह से धीमी पड़ गई! मंजीत ने बीच में ही कार रूकवा दी! वो कार से उतरा और अपनी जेब टटोलने लगा! सिगरेट और माचिस निकाली और सड़क के किनारे खड़े होकर कश पे कश मारने लगा! कार में शालिनी को बहुत गुस्सा आ रहा था! उसे सिगरेट के गंध से सख्त नफरत थी! कैमरामैन भी कार से उतर कर मंजीत के सिगरेट के धुंए में अपने सिगरेट के धुंए मिला रहा था! शालिनी सोच रही थी, कहीं हम से पहले दूसरे चैनल वाले वहाँ आ न धमके! मंजीत और कैमरामैन अपनी अपनी सिगरेट खत्म कर वापस लौट आए और गाड़ी में बैठे! अब शालिनी से रहा ना गया! उसने आखिरकार मंजीत से पूछ ही लिया, 'सर, कुछ डिस्कस कर लें घटना पर?' मंजीत को पहले तो हंसी आई! वो सोच रहा था, कितनी बेवकूफ लड़की है ये, मुझे 'सर' कह रही है! फिर उसने जवाब दिया, 'या श्योर, बट डोन्ट कॉल मी सर!' बेचारी शालिनी! उसने तो इंम्प्रेशन जमाने के लिए सर कहा था, पर मंजीत ने तो पानी फेर दिया! शालिनी चुप हो गई!

शालिनी की चुप्पी मंजीत को अब भीतर ही भीतर कचोट रही थी! इतने में ओ.बी. घटनास्थल के निकट आ पहुँची! कहीं एंम्बुलेंस की गाड़ियाँ खड़ी थी, तो कही रेस्क्यू की टीम लोगों की मदद कर रही थी! गाड़ी ब्लास्ट वाली जगह आ खड़ी हुई! सबसे पहले मंजीत गाड़ी से उतरा और घटनास्थल का मुआयना कर वापस लौटा ! मंजीत ने शालिनी से कहा, 'देखो, ये जगह अब भी सेफ नहीं है, कुछ और जिन्दा बम होने की संभावना है, सो बेटर यू स्टे इन ओ.बीं.!' शालिनी को कुछ समझ नहीं आया! वो चुपचाप ओ.बी. में बैठी रही! मंजीत कैमरामैन को लेकर बाहर चला गया! ड्राईवर भी थोड़ा हल्का होने चला गया! शालिनी ने मौका पाते ही ओ.बी. से बाहर निकलकर सब चीजों की पड़ताल की शुरू कर दी ! लाशों के ढेर लगे थे वहाँ!

हवा में एम्बूलेंस, पुलिस के सायरन, लोगों की चीख पुकार, अगल बगल से आते न्यूज रिर्पोटरों की आवाजें और बचाव कार्य के लोगों की अनाउन्समेंट एक साथ गूंज रही थी! शालिनी सभी चीजों को बारिकी से देख रही थी, इतने में मंजीत आया और उसका हाथ खींचते हुए सीधे ओ.बी.तक ले आया! 'तुम समझती क्या हो खुद को? कहा था ना. ओ.बी.से बाहर मत निकलना!' मंजीत आग बबूला था! शालिनी ने मंजीत से अपना हाथ छुड़ाया और बोली,' एक्सक्यूज मी सर, मैं भी यहाँ आपके साथ रिर्पोटिंग करने आई हूँ!'

मंजीत का जी चाह रहा था, शालिनी को एक थप्पड़ जड़ दें! पर उसकी आँखे और उसका मासूम चेहरा देखकर वो चुप हो गया! दोनों ओ.बी. के पास ही खड़े थे! शालिनी गुनाहगार की तरह और मंजीत जल्लाद की तरह! दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे! शालिनी की आँखे माफी मांग रही थी, और मंजीत की आँखें माफी ना देने का एहसास दिला रही थी! इतने में फिर पास ही जोरदार धमाका हुआ! मंजीत और शालिनी दोनों सहम गए! आसपास अफरा तफरी का माहौल हो गया! लोग बाग चीख पुकार के साथ भाग रहें थे! चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था! मंजीत ने खुद को संभाला और शालिनी को ओ.बी. में बिठाया! शालिनी सिसक सिसक कर रो पड़ी!

मंजीत ने उससे कहा,'यू नौंनसेन्स, दैट्स वाय आए टोल्ड यू सिट इनसाइड, बट यू वूमेन्स!!! कभी किसी की सुनना ही नहीं है! डिस्गसटींग !!!' शालिनी का रोना और तेज हो गया! वो सोच रही थी, कितना क्रूल कैरेक्टर है, एक तो मैं डरी हुई हूँ! उपर से ये भाषण पर भाषण झाड़े जा रहा है! उसने रूंधे हुए गले से कहा, 'एम सॉरी सर!' मंजीत को 'सर' शब्द सुनकर और गुस्सा आया! उसने तुरंत ड्राईवर को बुलाया और शालिनी को घर छोड़ आने को कहा! शालिनी जानना चाहती थी कि मंजीत और कैमरामैन कब लौटेंगे, पर मंजीत के चेहरे के गुस्से को पढ़ उसने खुद को रोक लिया! मंजीत घटना पर अपनी पैनी नजर डाले हुए रात भर रिर्पोटींग कर रहा था! उधर शालिनी सही सलामत घर तो पहुँच गई थी, पर उसकी नींद ना जाने कहाँ खो गई थी! जब भी वो सोने की चेष्ठा करती, तो आँखों के सामने मंजीत और वो ब्लास्ट दोनों नजर आता!
शालिनी बिस्तर से उठ कर टी.वी. के सामने बैठ गई ! लाइव सब कुछ देख रही थी ! मंजीत लाइव रिर्पोटींग कर रहा था ! मंजीत को देखते ही उसने तुरंत टी.वी. बंद किया ! ना जाने उसे क्या हो गया था ! अगली सुबह जब वो ऑफिस पहुँची, तो सारे के सारे उससे पूछने लगे कि वो ठीक है या नहीं ! सारे सवाल पे सवाल दागे जा रहें थे, पर शालिनी की निगाहें तो सिर्फ और सिर्फ मंजीत को ढ़ूढ़ रही थी ! वो क्राइम रिर्पोटर वाजपेयी जी की डेस्क पर पहुँची और उनसे कहा,' सर, मंजीत सर केम?' शालिनी को वाजपेयी जी ने ना में जवाब दिया ! वो चुपचाप चैनल हेड के कैबीन में पहुँची ! चैनल हेड ने उसे आज का काम सौंप दिया ! वो वापस आकर अपने डेस्क पर बैठ गई ! शालिनी का दिल आज कहीं नहीं लग रहा था! उसे आज मंजीत की तलाश थी ! डेस्क से उठकर वो कैंटीन की तरफ मुड़ी ! वहाँ पहले से ही रूकैया और अविनाश बैठै थे ! शालिनी ने कॉफी मंगवायी और रूकैया से कहा, 'आय एम वेरी वरीड यार, पता नहीं मंजीत सर कैसे होगें?' रूकैया को शालिनी की बातें हजम नहीं हुई ! उसने कहा, 'आर यू ओके? आय मीन यू आर वरीड अबाउट हीम...?' शालिनी ने रूकैया पर नजरें तरेरी, कॉफी के शिप को निगलते हुए बोली, 'येस, आय एम वरीड अबाउट हीम...कल जो भी हुआ, उसके बाद से मुझे अभी तक उनकी कोई खबर नहीं मिली है' ! इनकी गपशप चालू ही थी, इतने में अविनाश के सेल पर कॉल आया और नाम था, 'मंजीत' !!!

अविनाश ने फोन उठाया और कहा, 'हैलो,....हाँ...., हाँ वो यही है, वन सेक' ! अविनाश ने फोन शालिनी को थमाते हुए कहा, मंजीत इज ऑनलाइन, लो बात करो' ! शालिनी का दिल बंदरों की तरह गुलाटी मारने लगा, न जाने क्यूं वो मंजीत के कॉल को लेकर इतनी एक्साइटेड थी ! अविनाश के हाथ से झट से फोन छीनकर उसने कहा,''हैलो, शालिनी हियर सर ! आप कहां है ? और कैसे है ? और आप आज ऑफिस क्यूं नहीं आए ? पता है, कल मैं कितना घबरा गई थी ! आई वॉज सो स्केयर्ड सर.....' मंजीत ने शालिनी की बात बीच में ही काट दी और कहा, 'शालिनी....रिलैक्स....तुम रुकोगी, तब तो मैं कुछ कहूँगा ! आय एम फाइन ! वाजपेयी जी का फोन आया था, वो कह रहे थे, तुम मुझे पूछ रही हो, परेशां हो.… इसलिए कॉल किया था ! चलो रखता हूँ ! ओके टेक केअर....बाय' !!! शालिनी कुछ कहती, इसके पहले ही फोन कट चुका था ! रूकैया को ना जाने क्यू गुस्सा आ रहा था ! शालिनी पल भर में बदल गई ! मंजीत के सही सलामत होने की खुशी, जितनी उसे खुद नहीं हुई होगी उससे कहीं ज्यादा शालिनी को हो रही थी ! शालिनी कैटींन से बाहर निकली ! खूब चहलकर्मी करते हुए अपने डेस्क तक पहुँची ! उसकी खुशी चेहरे पर साफ छलक रही थी ! चैनल हेड रांउड पर था ! वो शालिनी के डेस्क पर आया और अपनी थूथरलोजी वाली हरकते दोहरानें लगा ! 'शालिनी, आप ने लंच कर लिया ?' चैनल हेड ने पूछा ! 'नॉट येट सर' ! शालिनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया !

चैनल हेड ऩे जब देखा, शालिनी उसे ज्यादा भाव नहीं दे रही है, अपने काम में व्यस्त है ! तो उसने अपने कैंबीन की तरफ रूख किया ! जैसे तैसे शालिनी का आज का दिन कट ही गया ! शालिनी जब घर लौटी, तो सबसे पहले माँ को गले लगाया और चूमा ! 'न जाने कब सुधरेगी ये लड़की' ! माँ ने हँसते हुए कहा ! शालिनी ने जोर से कहा, 'कभी नहीं, माँ ! मैं सुधर जाऊं, ऐसा मुमकिन नहीं' ! और दौड़ती हुई अपने कमरे की तरफ चली गई ! रोज की ही तरह उसने अपनी डायरी निकाली और उसमें लिखा, 'डे वाज गुड' ! शालिनी जिंदगी को जीने वाली लड़की थी, उसे लाईफ में हर वो चीज करना था, जिससे लाईफ एंवेन्चरेंस कहलाएं ! हाँ, बस वो प्यार व्यार के झमेलें से थोड़ा दूर ही रहती थी ! उसे प्यार होता भी कैसे ? दिखने में भले ही वो बला की खूबसुरत थी, पर लड़कों के सामने जब भी उसकी जुबान खुलती, लड़के रफूचक्कर हो जाते ! वो लोगों को रेस्पेक्ट देना जानती थी, पर सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही ! इधर मंजीत को महसूस हुआ कि शालिनी को कॉल करके उसने कुछ ओवर तो नहीं कर दिया ! ऊपर से वो भी अविनाश के नंबर पर ! पता नहीं ऑफिस के लोग क्या सोच रहें होगें ! पर वो लड़की भी तो पागल ही है ना ! बिना बात के परेशान होने लगती है! पर मैं क्यूं उसके बारे में इतना सोच रहा हूँ ! वैसे भी कल की रिर्पोटींग के बाद काफी थक गया हूँ ! मंजीत ने एक पैग बनाई, सिगरेट जलाया और अपनी दुनिया में लीन हो गया!
अगले दिन मंजीत ऑफिस में कुछ जरुरी काम कर रहा था। वो बीच बीच में उठ कर शालिनी के डेस्क के चक्कर काटता। पता नहीं क्यूँ शालिनी बार बार उसके जेहन में आ रही थी। शालिनी अभी तक ऑफिस नहीं आयी थी। मंजीत को ना जाने क्या हो गया था। वो पता नहीं क्यों किसी लड़की के बारे में इतना सोच रहा था। वो तो भूल ही गया था, उसकी इमेज तो ऑफिस में रुड और शख्त टाइप के आदमी की सी है। ये सब सोचते हुए मंजीत को चाय की तलब लगी, वो चाय पीने कैंटीन की तरफ चल पड़ा। मंजीत जब तक कैंटीन में चाय पी रहा था, तब तक शालिनी ऑफिस में आ चुकी थी। वो अपने डेस्क पर काम में व्यस्त थी। मंजीत जब कैंटीन से वापस आ रहा था, तब शालिनी ने उसे देख लिया और उसके पीछे पीछे उसके कैंबिन की तरफ चल पड़ी।

"सर, कब आये आप? और आप ठीक है ना?" शालिनी ने उत्सुकतावश पूछा। मंजीत के दिमाग में एक बार फिर 'सर' शब्द सुनकर ज़ोर का ब्लास्ट हुआ।  "सर" इस शब्द से शख्त नफरत थी उसे। वो भी अगर कोई लड़की कहे, फिर तो वो आग बबूला हो उठता था। पर वो शालिनी को कुछ नहीं कह पाया। ना जाने शालिनी की आँखों में क्या था। मंजीत को शालिनी का इस तरह उसके कैबीन में आना भी अच्छा नहीं लगा। अगर चैनल की किसी और लड़की ने ये हरकत की होती, तो ऑफिस में अब तक हंगामा मच गया होता। पर शालिनी को उसने कुछ ना कहा।

"सर, बोलिए ना? आपको उस दिन मुझ पर बहुत गुस्सा आया होगा ना? मैं जानती हूँ, मैं तो पागल हूँ ही। किसी की नहीं सुनती, मेरी वजह से आपको भी तकलीफ हुई उसके लिए आय ऍम सॉरी……!!!!!" शालिनी के लाउड स्पीकर को मंजीत ने बीच में ही तोड़ दिया और कहा, 'शालिनी, इट्स ओके। अब जाओ और जाकर अपना काम करो। '

शालिनी तिलमिलाई हुई मंजीत के कैबिन से बाहर निकल आई।
इधर ऑफिस में खुसुर फुसुर चालु थी। शालिनी का मंजीत के कैबिन में जाना ऑफिस वालो के लिए गॉसिप करने का पॉइंट बन गया था। 'मंजीत और शालिनी के बीच कुछ तो पक रहा है!' बॉलीवुड बीट के रजत ने कहा। उसकी बात का समर्थन करते हुए कैमरामैन उदय बोला, 'कुछ नहीं रजत, बहुत कुछ। ' और सारे ठहाके लगाने लगे। शालिनी को अपनी तरफ आता देख सारे सामान्य हो गए।

'अपने आप को समझता क्या है ? मैं तो सिर्फ सॉरी बोलने गई थी, पता नहीं इस खडूस और अकड़ू इंसान से लोग कैसे डील करते है.…हुंह ! रुकैया सही कहती है। ही इज साइको !!! गो टू हेल!!! ' अपने मन में भनभनाते हुए शालिनी कैंटीन पहुंची और एक कॉफ़ी का आर्डर दिया। दोनों के बीच एक दूसरे को अनदेखा करने की होड़ सी लगी थी ! समय सब कुछ बदल देता है | नफरत करते करते ना जाने कब इन दोनों के बीच प्यार का बीज पनपा इन्हें खुद ही नहीं महसूस हुआ| शालिनी के बर्थडे पर आखिरकार दोनों की बात शुरु हो ही गई! फिर दोनों मिलकर एक ही स्टोरी पर काम करने लगे। नाईट शिफ्ट में मंजीत शालिनी को घर छोड़ने आता था और शालिनी अक्सर मंजीत के लिए टिफ़िन लेकर जाया करती थी। टी ब्रेक में दोनों टपरी की चाय पीने जाया करते थे। रुकैया जो की शुरू से ही मंजीत को पसंद करती थी। उसे ये सब बातें हज़म नही हो रही थी। मंजीत का यूँ शालिनी की तरफ पिघल जाना, उसे रास नही आ रहा था। उसने सोचा क्यों ना दोनों में फूट डाली जाए इसलिए उसने भरसक कोशिश की शालिनी को मंजीत के प्रति भड़काने की | लेकिन हर बार वो नाकाम होती रही| इनकी प्रेम कहानी चरम पर थी पर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था| एक दिन बारिश के समय दोनों टपरी से चाय पीकर लौट रहे थे| अचानक शालिनी ने धीमे से मंजीत के कान में 'आई लव यू' कहा! दोनों दूर सड़क पर एक साईकिल की ओट में एक दूसरे की बांहों में थे | अचानक कुछ देर बाद उस साईकिल में जोरदार विस्फोट हुआ| सब तितर बितर हो गया| शालिनी का दुपट्टा, मंजीत की घड़ी सब आसमान में उछल गए! आनन फानन में दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया| पूरे ऑफिस में सन्नाटा पसरा था ! दो दिन बाद जब मंजीत को होश आया तो उसे बताया गया कि शालिनी अब नहीं रही | मंजीत ने आंखे बंद की और जोर से चीख कर पुकारा 'शालिनी.......!!!!!' | और आखिरकार जिस विस्फोट के कारण दोनों मिले थे, आज उसी ने उन्हें अलग कर दिया |

2 comments:

Unknown said...

BAdhai ho...ek sundar kaahani ke liye....Meri niji raay hai ki kahaani ka sishak vaise to achcha hai lekin agar Is kahaani ko Visfot naam diya jaata to bhi theek lagta...khair bhavishay ki shubhkamanaon sahit.:)

Shivangi Thakur said...

shukriya sonam !!!
vaise kahani adhuri reh gayi thi isliye iska naam unki adhuri kahani rakha....
visfot agli kahani me karenge :p