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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Tuesday, 24 June 2014

मां हर पल गले लगाती है
पापा नहीं लगाते !
ऐसा नहीं है कि प्यार नहीं है
बस वो नहीं जतलाते !

मां के दिल में प्यार भरा है
पापा है जज्बातों को संभालें !
मां की ममता हर कोई जानें
पर पापा बड़े मतवाले !

पापा की सिर पर है
जिम्मेदारियों की गठरी !
हमारी मांगे हरदम हो पूरी
चाहे उनकी रहे ठहरी !

दुनिया का है नियम ये
पापा रहे सदा गंभीर !
मन में सारे भाव छुपाए
ना बहाए आंखों से नीर !

हम सोचते है हर पल ये
कि पापा कुछ नहीं है जानें !
पर पापा है बड़े निराले
हमारी हरएक नब्ज पहचानें !

दुनिया के भूगोल में हमें
सिखलाते अपनी जगह बनाना !
हम चाहे उन्हें देखेे ना देखे
वो बांचे हमें रोजाना !

कॉलेज स्कूल के उत्सव में
उनका शामिल ना हो पाना !
पर देर रात तक जागकर
मेरी ट्राफियों को निहारना !

मां की तरह वो बिल्कुल भी
ना है ममतामयी !
पर मेरे लिए वो
हर पल है
इस जग में सर्वोपरि !

- शिवांगी ठाकुर




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