16.
बिस्तर पर बेपरवाह लेटी गुंजन। पूरा कमरा यूँही अस्त व्यस्त पड़ा। वो हाथ में डायरी लिए पुराने शब्दों को पढ़ती, और फिर अपने आँखों से मोतियों सरीखे बुँदे टपकती। राज का केवल इतना कहना कि ये शादी अब नहीं हो सकती, उसके नाजुक से दिल को तोड़ने के लिए काफी था। 3 साल का रिश्ता बस एक मैसेज से खत्म हो गया। " प्य्रारी गुंजन, तुम बहुत अच्छी लड़की हो। तुम्हे कोई अच्छा लड़का मिल जायेगा। पर अब मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता, और इसकी वजह बस इतनी है कि मैं बदल गया हूँ। मेरी लाइफस्टाइल बदल गयी है, और शायद तुम इस लाइफस्टाइल में एडजस्ट नहीं कर पाओगी। इसलिए मेरे और तुम्हारे, दोनों के लिए बेहतरी इसी में है कि हम इस रिश्ते को यही खत्म कर दे।" कमरे के लाइट और खिड़कियों को बंद कर वो एक बार फिर गुमनाम अँधेरे में सो गई।
17.
"तुम इतनी हठी क्यों हो? कबसे समझा रहा हूँ तुम्हे कि अभी ये सब लेना हमारे बजट से बाहर है." राज ने झुंझलाते हुए तनीशा से कहा। तनीशा रुआंसी होकर किचन की तरफ चली गयी। राज सोच रहा था, इस महीने तो वाशिंग मशीन लेना मुमकिन नही है। अगले महीने ले लूंगा। यहाँ तनीशा किचन के भीतर भनभनाती हुई, राज को डिनर परोस रही थी। राज खाना खा तो रहा था, पर तनीशा का ऐसा उतरा चेहरा देखकर खाना उसके हलक से नीचे नही उतर रहा था। अगली सुबह तनीशा बिस्तर पर ही थी, उसी वक़्त उसके कान में कुछ आवाज़ें गूंजने लगी। 'भैया, संभाल के उतारो और उस कोने में प्लग है। इसे वही फिट कर दो।' तनीशा आशंकित हो कर जब कमरे से बाहर आई, तो देखा हॉल में नया वाशिंग मशीन आया था। उसकी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा। राज से उसने कहा, 'ये तो तुम्हारे बजट के बाहर था ना? फिर ये सब कैसे?' राज मुस्कुराया और तनीशा को अपनी और खींचता हुआ बोला, " कोई भी बजट तुमसे बढ़कर थोड़ी न है। "
18.
"देख वो इसी तरफ आ रहा है, छुप जा तू...." गुड्डी ने पारो से कहा. पारो पेड़ की ओट में जा छुपी. वो शख्स हवा की तरह तेजी से उनके करीब से गुजरा. उसके जाते ही पारो गुड्डी की तरफ लपकी और कहा, 'कैसा लगा, बोल ना कैसा लगा?'. गुड्डी मद्धम मुस्कुराई और बोली, 'लड़का तो काफी स्मार्ट है. एकदम हीरो लगता है हीरो...तू हां बोल दें.' अब जाकर पारो का साहस बढ़ा. चैन की सांस लेते हुए वो बोली, 'हां यार, लड़का तो अच्छा है, और देख आते जाते पराई लड़कियों पर नजर भी नहीं डालता. चल गुड्डी बाउजी से आज कह ही देती हूं, मुझे ये रिश्ता मंजूर है. '
19.
उसका उदास चेहरा और भीगी आंखें दोनों इस बात का प्रमाण थी कि वो अभी अभी वॉशरुम से रो कर निकली है. पर्स से कॉमपैक निकालकर उसने अपने आई लायनर और काजल को ठीक किया. अपने उदास चेहरे पर फिर एक बनावटी मुस्कान लेकर वो अपने डेस्क पर जा बैठी. उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि सच बोलने की उसको इतनी बड़ी सजा मिलेगी. ये नौकरी उसके लिए बेहद जरूरी थी, पर खुद्दारी भी कोई चीज होती है. खैर उसने अपने टेबल पर पड़े रेजिगनेशन लेटर को उठाया और बॉस के कैंबीन में जा पहुंची. बॉस से मुखातिब होकर उसने कहा, "आप क्या मुझे नौकरी से निकालेंगे. मैं खुद आपकी नौकरी छोड़कर जा रही हूं, और हां किसी भी लड़की के लिए उसकी इज्जत सबसे उपर है. जिस तरह का माहौल आपने यहां बना रखा है, मैं तो क्या, कोई भी लड़की यहां काम नहीं करेगी. कोई कुछ नहीं कहता, इसका ये मतलब नहीं कि आप जो भी करें वो सही है. आपकी नौकरी आपको मुबारक हो...गुड बाय....."
20.
'ओए, रुक जा...कहां जा रही है?' सिम्मी ने किट्टू का हाथ खींचते हुए कहा. 'तू मत रोक मुझे, समझी...! आज मैं उसे नहीं छोड़ूगी. वो समझता क्या है खुद को...और तू उसकी साइड मत लें, वरना तुझे भी एक चपेट लगेगी.' किट्टू ने प्रितेश द्वारा दिया गया लेटर फाड़ते हुए कहा. कॉलेज कैंटीन से उफान मारती हुई वो क्लासरुम तक आ पहुंची. क्लास में उसे प्रितेश कहीं नहीं दिखा. वो आगबबूला हो अपनी बेंच पर जा बैठी. बैंच में उसे एक और लेटर चॉकलेट में लपेटा मिला. लेटर में लिखा था,
" किट्टू,
मुझे पता है मेरे प्रपोजल के बाद तेरा पारा चढ़ जाएगा. तू खुब गुस्सा होगी. प्लीज अगर तेरी 'ना' है, तो भी चलेगा. लेकिन यूं गुस्सा करके अपने चेहरे के ग्लो को कम मत होने दे, और हां सिम्मी को कुछ मत कहना. वो बेचारी तो लेटर नहीं लें रही थी, मैनें ही उसे जबर्दस्ती थमाया था. तुझे चॉकलेट्स पसंद है ना, तो प्लीज इसे खा लें और गुस्सा थूक दें. (प्रितेश)..."
किट्टू का गुस्सा अचानक छू मंतर हो गया और वो एक बार फिर प्रितेश को ढूढ़ने लगी, पर इस बार एक अलग फिलिंग्स् के साथ.
" किट्टू,
मुझे पता है मेरे प्रपोजल के बाद तेरा पारा चढ़ जाएगा. तू खुब गुस्सा होगी. प्लीज अगर तेरी 'ना' है, तो भी चलेगा. लेकिन यूं गुस्सा करके अपने चेहरे के ग्लो को कम मत होने दे, और हां सिम्मी को कुछ मत कहना. वो बेचारी तो लेटर नहीं लें रही थी, मैनें ही उसे जबर्दस्ती थमाया था. तुझे चॉकलेट्स पसंद है ना, तो प्लीज इसे खा लें और गुस्सा थूक दें. (प्रितेश)..."
किट्टू का गुस्सा अचानक छू मंतर हो गया और वो एक बार फिर प्रितेश को ढूढ़ने लगी, पर इस बार एक अलग फिलिंग्स् के साथ.

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