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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Saturday, 22 February 2014

वोट दे दो बहन !!!

आजकल हर जगह चुनावी बयार चल रही है! इन्ही बयारों के बीच कभी कोई वोटिंग राइट्स का हवाला देता हुआ नज़र आता है, तो कोई महिलाओं के वोटों पर विशेष ध्यान देता हुआ!
'वोट' एक ऐसा हथियार, जिसके इस्तेमाल से बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुनें, हम अपना भविष्य बदल सकते है! केवल अपने अधिकार को समझने की जरुरत है!
मैं खुद इतने लम्बे लम्बे भाषण दे रही हूँ, पर अभी तक मेरा वोटर आयडी कार्ड नहीं बना है! ऐसा नहीं है कि मैं वोटिंग को लेकर जागरूक नहीं हूँ! मैं वोट देना चाहती हूँ, आख़िरकार ये तो मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है! पर लगता है, देश के नेता मुझसे वोट ही नहीं लेना चाहते! कहने का तात्पर्य ये है कि कुल मिलकर पांच दफे मैंने वोटिंग कार्ड बनवाने की जद्दोजहद की! ३ बार मैनुअल और दो बार ऑनलाइन! पर कुछ भी हाथ नहीं लगा!
हर बार मुँह की खानी पड़ी!


महिलाओ के वोटो पर आजकल राजनीति खूब गरमाई हुई है! हर कोई ४९% महिला वोटो को लुभाने की कोशिश कर रहा है! महिलाओं के बीच जागरूकता फैलायी जा रही है, कि आपका वोट कीमती है आप वोट अवश्य दे!
अरे भाई, जो लोग ये कह कर महिलाओ को लुभाने की कोशिश कर रहे है, उन्हें उनके घर के पुरुषों को लुभाने की कोशिश करनी चाहिए! आख़िरकार भारत में आज भी महिलाये अपने पति से ही पूछकर वोट डालती है! ४९% में १% कम है हम, वर्ना हम तो पुरुषों के बराबर होते, लेकिन केवल आंकड़ो में! असलियत तो कुछ और ही है!


आजकल टाटा टी की नयी मुहीम जागो रे में आपको महिला वोटो को जागरूक करने की कोशिश दिखाई देगी! कभी ऋचा अनिरुद्ध को उनके शो में महिला सशक्तिकरण और उनके वोटिंग राइट्स के बारे में कहते हुए सुनेंगे! और आजकल तो स्टार प्लस भी पिछे नहीं रहा भाई! वीरा अपने वीरजी को छोड़ वोटिंग रजिस्ट्रेशन की डिटेल्स देती हुई नज़र आएँगी! कमाल है! इसी बीच वीरा हमें ये भी बता देती है, कि १८ साल की उम्र पार करने के बाद बॉयफ्रेन्डस् घूमाने की भी आज़ादी मिल जाती है! (हे भगवन, ये ब्लॉग पापा ना पढ़ले, वर्ना शामत आ जायेगी)
खैर जो भी हो आखिरकार बाज़ार में वुमन्स सेफ्टी, वुमन्स राइट्स और ना जाने महिलाओ के लिए कितने मुहीम चलाये जा रहे है! पर असलियत तो हम सबको मालूम है बाबू मुशाय!!!!



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