भारतीय राजनीति किसी " रियलिटी शो " की तरह नज़र आती है ! जी हाँ, मैं बिल्कुल सही कह रही हूँ ! जिस तरह रियलिटी शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री मार, कई लोग जीत जाते है। या फिर फिनाले राउंड तक पहुच जाते है, आजकल कुछ वैसी ही उथल-पुथल भारतीय राजनीति में भी देखने को मिल रही है !
"हाथ" दिखा दिखाकर रोका गया, पर ये झाड़ू का ही जादू था, जो दिन ब दिन चलता ही गया ! खैर जादू चला तो है, पर पूरी तरह नहीं! नैया बीच मझधार में ही लटकी पड़ी है! अब ये तो वक़्त ही बतायेगा कि कौन लगाता है, दिल्ली की नैया पार!
"कमल" का फूल खिला तो है, पर इतनी खुशमिजाजी से नहीं, कि कीचड़ उसे उखाड़ न फेंके! अब भी थोड़ी कसर बाकी है! अब ये कसर कब पूरी होती है, वो तो मौसम के बदलते मिज़ाज़ ही बताएँगे!
झाड़ू गन्दगी साफ़ करने को तैयार तो है, पर उसे एक मौका तो मिले।
लाख जतन करले दुनिया पर झाड़ू हार नहीं मानने वाला ! और भला माने भी क्यों ???
आज सिर्फ एक साल की मेहनत और ईमानदारी ने उसे इस काबिल बना दिया कि अब दिल्ली में उसकी तूती बोलती है! और अनशन तो अब भी जारी है! पर ये तो वक़्त ही बतायेगा कि लोकपाल बिल पास होता है, या फिर लोकपाल बिल लाने वालो पर बिल फटता है!
और हाँ दिल्ली के चुनावो में इतने बड़े उटलफेर के लिए कही न कही हम युवा भी जिम्मेदार है!
वोट को अपना अधिकार समझ और अपना नेता चुनने की भी समझ आखिरकार हममे आ ही गयी है! तभी तो पॉलिटिक्स को इतना राउंड घुमा दिया है, कि जनाब सुलझाते रहिये !
- शिवांगी बी. ठाकुर
"हाथ" दिखा दिखाकर रोका गया, पर ये झाड़ू का ही जादू था, जो दिन ब दिन चलता ही गया ! खैर जादू चला तो है, पर पूरी तरह नहीं! नैया बीच मझधार में ही लटकी पड़ी है! अब ये तो वक़्त ही बतायेगा कि कौन लगाता है, दिल्ली की नैया पार!
"कमल" का फूल खिला तो है, पर इतनी खुशमिजाजी से नहीं, कि कीचड़ उसे उखाड़ न फेंके! अब भी थोड़ी कसर बाकी है! अब ये कसर कब पूरी होती है, वो तो मौसम के बदलते मिज़ाज़ ही बताएँगे!
झाड़ू गन्दगी साफ़ करने को तैयार तो है, पर उसे एक मौका तो मिले।
लाख जतन करले दुनिया पर झाड़ू हार नहीं मानने वाला ! और भला माने भी क्यों ???
आज सिर्फ एक साल की मेहनत और ईमानदारी ने उसे इस काबिल बना दिया कि अब दिल्ली में उसकी तूती बोलती है! और अनशन तो अब भी जारी है! पर ये तो वक़्त ही बतायेगा कि लोकपाल बिल पास होता है, या फिर लोकपाल बिल लाने वालो पर बिल फटता है!
और हाँ दिल्ली के चुनावो में इतने बड़े उटलफेर के लिए कही न कही हम युवा भी जिम्मेदार है!
वोट को अपना अधिकार समझ और अपना नेता चुनने की भी समझ आखिरकार हममे आ ही गयी है! तभी तो पॉलिटिक्स को इतना राउंड घुमा दिया है, कि जनाब सुलझाते रहिये !
- शिवांगी बी. ठाकुर

2 comments:
सबसे पहले तो कलम उठाने के लिए बधाई। वह भी सबसे मुश्किल में से एक (मेरे अनुसार) विधा व्यंग्य में लिखने की कोशिश की उसके लिए आपकी हौसलाहफजाई।
लिखते रहो, हो सकता है कल को हमे एक नया हरिशंकर परसाई मिल जाए। भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।
हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !!!!
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