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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Tuesday, 10 September 2013

गैजेट्स की अमीर दुनिया के गरीब लोग ....

आजकल हर कोई  स्मार्ट फोन  लेकर घूमता है! भले ही उन्हें फोन चलाना आता हो, या न आता हो, बस हाथ में हाथ से भी बड़े बड़े फोन दिखाई देते है! भाई आखिर स्टेटस का सवाल है! आज का युवा वर्ग तो किसी भी चीज़ में अपने आप को पीछे नहीं रखना चाहता! अगर किसी फ्रेंड के पास अच्छा सा मोबाइल फोन है, तो हम क्यों पीछे रहे? तुरंत जाकर अपने माता-पिता के सामने फरमान जारी कर देते है, की हमें भी वैसा ही फोन चाहिए! इस मामले में मैं भी ऐसी ही हूँ, मेरा बस चले तो रोज़ नए नए गैजेट्स का इस्तेमाल करू.…(आफ्टर आल ऍम अ ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी गर्ल यार)….

मेरे पिताजी मेरी इन्ही हरकतों से बहुत परेशान रहते है! कहते है हमारे ज़माने में तो ये डब्बा था, ही नहीं! न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी! पर तुम लोगो का तो इसके बिना एक पल गवारा नहीं! न जाने कब ये बला टलेगी! पर पिताजी को कौन समझाए, की ये बला टलेगी नहीं, बल्कि इसकी लत तो और लगती ही चली जाएगी!

मेरी एक दोस्त के पास  सैमसंग टैब है! पापा को टैब देखकर बड़ी हैरानी हुई! पापा ने लैपटॉप तो देखे है, और हम लोग उसे कैसे इस्तेमाल करते है, ये भी देखा है! पर टैब थोडा नया था, उनके लिए! मेरी दोस्त को शायद किसी का फोन आया था, उसने टैब उठाकर अपने कान पर लगा दिए और बाते करने लगी! पापा हैरान परेशान लग रहे थे, उन्होंने मुझसे पूछा, "इससे बात भी होती है?" मैंने कहा "हां", पापा ये कंप्यूटर और फोन दोनों का काम करता है! पापा फिर शुरू हो गए, कहने लगे " इतना भारी फोन ? हाथ के साथ साथ कानो को भी तकलीफ। पता नहीं आज के युवा वर्ग को क्या हो गया है?  भला ऐसा भी कोई फोन होता है! नासपीटे कंपनी वाले अपने सामान को बेचने के लिए न जाने क्या क्या बना देते है!" 

मैंने इस बार चुप रहना ही ठीक समझा! आज हमारे पास घड़ी,कैलकुलेटर,कैमरा,म्यूजिक सिस्टम और कई ऐसी चीज़े है, जिनका अकेला कार्य करता है मोबाइल फोन! आज हम सुबह नाश्ता करना भूल जाते है, ऑफिस की महत्त्वपूर्ण फाइल भी घर भूल जाते है, पर मोबाइल नहीं भूलते! 

मैं तो एक दिन क्या एक घंटा भी इसके बिना नहीं निकाल सकती! बीबीऍम, वाटस एप्प, फेसबुक, ट्विटर, जीमेल इन सबके बिना तो लाइफ अधूरी सी लगती है! काश पापा के जमाने में भी ये सब होता, तो मम्मी और पापा की शादी का लाइव विडियो हम देख सकते! काश पापा और मम्मी भी उस वक़्त फेसबुक पर अपना रिलेशनशिप स्टेटस बदल सकते! पर कहते है, ना! देर आये दुरुस्त आये! कम से कम हम तो इस गैजेट भरी दुनिया के चश्मदीद गवाह है!

पापा कहते है एंड्राइड और नॉन एंड्राइड फोन से क्या फर्क पड़ता है?
पापा इससे बहुत फर्क पड़ता है! आपके जमाने में नही था ना, इसलिए आपको नहीं पता!       
खैर मुझे तो गैजेट्स से प्यार है, और भगवान् करे ये प्यार दिन ब दिन बढ़ता ही चला जाये :) :) :)    

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