आज मन बड़ा विचलित हो रहा है! इसके कई कारण है! सबसे पहला तो ये की सोने और डॉलर की आसमान छूती ऊंचाई ! ऊपर से अब पेट्रोल और डिजलो की बढती कीमत! खैर मुझे न तो सोना खरीदना है, और नाही डीजल या पेट्रोल! बस उन लोगो पे बड़ा तरस आता है, जो ये सब लेने की सोच रहे है!
कभी कभी विचार करती हूँ, की अगर मेरे पिताजी को अकस्मात मेरी शादी करनी पड़ जाए, तो न जाने कहा से वो कुबेर का खजाना खोज कर लायेंगे! हमारा भारतीय समाज ना जाने क्यूँ सोने और चांदी के पीछे पागल हुआ बैठा है! जिसे देखो वो बस गहने बनवाने के पीछे पागल है! कोई अपना पेट काटकर गहने बनवा रहा है, तो कोई अपनी कमाई का पाई पाई जमा कर के अपनी अर्धांगिनी को तोहफा दे रहा है!
औरतो ने तो इस प्रथा को इतना बढ़ावा दे डाला है, की घर पर भले ही खाने की चीज़ मौजूद न हो, पर गले में चन्द्रहार और हाथो में जड़ाऊ कंगन जरुर होने चाहिए! हमारे समाज में जिस स्त्री के पास ये सभी चीज़े ना हो उसे गरीब समझा जाता है! कई औरतो का मानना है, की जेवर उन के सुख दुःख के साथी है! मुसीबत आने पर जेवर ही काम आते है, पर मुझे तो लगता है, सारे फसाद की जड़ ये जेवर ही है! हम भारतीयों ने ही सोने को इतनी प्राथमिकता दे डाली है, की इसके दाम आसमान चूमने लगे है!
रही बात डॉलर की तो अब पता नहीं मध्यम वर्ग कैसे अपने बच्चो को आगे पढने के लिए विदेश भेजेगा! डॉलर का असर आखिरकार उनकी फीस पर भी तो पड़ता है! वहां रहने, खाने- पीने, पढने-लिखने सब पर इसका असर पड़ता है! खैर इससे हमें क्या? हमारे हाथ में तो सत्ता है, नहीं की सारी कायापलट कर दे! एक जादू करे और मानो सारी चीज़े छू मंतर हो जाये!
अब तो बस यही मन करता है, की अपने माता पिता से कहु की मुझे न सोना चाहिए ना चांदी! बस कुछ ऐसा दीजिये, जिस पर सरकार की नज़र न पड़े और वो उसके दाम न बढ़ा सके! पता नहीं ऐसी कौनसी चीज़ है, जिस पर हमारी सरकार की नज़र ना पड़ी हो, मुझे बस अब वही चीज़ चाहिए…

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