कहाँ गए वो लोग जो बहुत बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे, की मुंबई में लडकियाँ बहुत सुरक्षित है !
आज उनके सारे दावो की पोल खुल गई और असलियत हम सभी के सामने है !
मुंबई से हमें ये उम्मीद नहीं थी.….
पर इन सब से मुंबई और दिल्ली का क्या लेना देना है!
लेना देना तो उन असामाजिक तत्वों से है, जो हर बड़े शहरो में खुलेआम घुम रहे है!
अब मैं नहीं कह सकती की लड़कियां मुंबई में बहुत सुरक्षित है!
और कहु भी तो कैसे? कल की घटना के बाद तो कतई नहीं।
बस इतना कह सकती हूँ की मुंबई पुलिस ने अपनी हिम्मत दिखाई है, और गुनाहगारो को पकड़ना शुरू किया है! पर मेरा एक सवाल है?
क्यूँ हम दामिनी वाले हादसे से सीख नही लेते?
कब तक ये सब होगा? कब तक हम यूँही तमाशा देखते रहेंगे?
आखिर क्यूँ आये दिन ऐसी घटना घटती है, जिससे हमारे देश को शर्मशार होना पड़ता है!
हम क्यूँ अपने समाज को ये सीख नहीं दे पा रहे है, की औरतो की इज्ज़त करे!
कब लोगो की मानसिकता बदलेगी?
क्या अब हम लडकियां अपने आप को घर में बंधक बना ले ताकि हमारे साथ ऐसी कोई घटना न घटे!
क्या इस बार भी हमारा समाज सिर्फ कैंडल मार्च करेगा और इतने बड़े हादसे को भूल जायेगा?
खैर इन सब को छोड़ के उस लड़की बारे में सोचिये।
एक लड़की जिसने सपना देखा था, की वो एक फोटोग्राफर जर्नलिस्ट बनेगी और अपने खिचे हुए चित्रों से लोगो की बातो को व्यक्त करेगी!
पर क्या इस घटना के बाद वो दुबारा ये सब कर पायेगी? क्या अब भी उसका नजरिया समाज के प्रति वैसा ही रहेगा!
हमारे समाज में तो ऐसा कुछ होने के बाद लोग ऐसे हेय दृष्टी से देखते है, की मानो सारी गलती लड़कियों की ही होती है !
अब डर लगता है हमें भी.…
हम भी सोचते थे, की हम सबसे सुरक्षित जगह रह रहे है! लेकिन हमारी आँखों पे बंधी पट्टी उतर चुकी है!
बस आशा करती हूँ की वो लड़की जल्दी ठीक हो जाए! दोषियों को सजा मिले ऐसा मैं नहीं कह सकती,
क्यूंकि मुझे अब कोई उम्मीद ही नहीं है! सजा मिल के भी क्या उनकी मानसिकता बदल पाएगी?
क्या गारंटी है, की वो दुबारा ऐसी हरकत नहीं करेंगे?
देखते है इस बार इस घटना पर कितनी राजनीति होती है, और इस बार इस लड़की को न्याय मिलता है या नहीं?

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