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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Tuesday, 13 August 2013

दादी बहुत बीमार है सर….

शीर्षक देखकर ये नहीं सोचियेगा की मेरी दादी को कुछ हुआ है ! मेरी अपनी दादी तो फिलहाल भली- चंगी है, पर मैं  उन सभी लोगो की बात कर रही हूँ, जो अपनी छुट्टी के लिए दादी या नानी के मरने का बहाना करते है !
हमारे स्कूल के दिनों में एक लड़की हुआ करती थी, जिसने अपना असाइनमेंट पूरा नहीं किया तो अपनी ही दादी को मृत घोषित कर दिया! आपने भी तो कभी ना कभी दादी के मरने या बीमार होने का बहाना बनाया होगा ?
दादी और नानी वो लोग है जो बच्चो को सबसे ज्यादा प्यार करते है, जान न्योछावर करते है, अगर माँ-बाप किसी चीज़ के लिए मना करे तो दादी ही है, जो उन्हें मना लेती है, पता नहीं कितने बच्चो के साथ दादी रहती होगी, ये बच्चे अपनी दादी को मारने में जरा भी संकोच नहीं करते है, शायद उनके घरो में दादियो की मरी हुईं हालत होगी, तभी तो एक छोटी सी छुट्टी के लिए अपनी बूढी दादी को बीमार कर देते है ! वैसे
 उन बुजुर्गो को क्या पता की जिस बच्चे को वो पुचकार रहे है, लाड-प्यार कर रहे है वही बच्चे अपने मतलब के लिए उन्हें अपने दफ्तर, स्कूल और कॉलेज में बीमार या मृत घोषित कर आते है !
जो लोग भी ऐसा करते है उन्हें ये आर्टिकल पढने के बाद अपने आप को बदल लेना चाहिए !
क्या आप नहीं चाहते की आपकी दादी और जीये, शायद आपके झूठ की वजह से भी उनकी उम्र कम होती जा रही हो?
एक बार दादी या नानी को मारते समय जरुर विचार करे की आखिर हम भी तो कभी बुढे होंगे ! तब हमें भी इसी तरह जीते जी मृत घोषित कर दिया जायेगा !
कैसा लगेगा आपको ?
इसलिए अपनी छुट्टी के लिए दादी या नानी को मारने के बजाय सही बात करे और मन में झूठ का बोझ न पाले !
बाद बाकि आपकी मर्ज़ी …।



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