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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Saturday, 10 August 2013

एक होनहार की आत्महत्या

कल शाम समाचार देख रही थी ! भोपाल की दुर्घटना ने दिल में फिर एक सवाल पैदा कर दिया !
क्या रैंगिंग किसी की जान भी ले सकती है !
अनीता शर्मा नाम की १८ वर्षीय लड़की जो की बी फार्मा की स्टूडेंट थी, आखिर ऐसा क्या हुआ उसके साथ जो उसने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी ! ज़िन्दगी से कई ज्यादा बेहतर अब उसे मौत लग रही थी!
उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, की उसके सीनियर्स उसे तब से परेशान कर रहे है जबसे उसने कॉलेज में दाखिला लिया है और उन चार सीनियर लड़कियों के साथ साथ कॉलेज के एक टीचर भी शामिल है !
वो बहुत परेशान थी, उसने अपने भाई को भी ये बात बताई थी, और भाई ने भी दिलासा दिया था की पापा कुछ करेंगे !पर किसी को नहीं पता था की अनीता इतनी जल्दी हार मान लेगी और इतना बड़ा कदम उठा लेगी ! उसने सुसाइड नोट में अपने पापा से गुजारिश की है, की जब वो लोग उसे जलाने ले जाये तो उसे पिंक कलर की ड्रेस पहनाये !
परिवार सदमे में है, एक होनहार बेटी को खोने का गम उनके अलावा और कौन जान सकता है!
पर क्या आत्महत्या किसी चीज़ का अंत है?
क्या उसके आत्महत्या कर लेने से ये सब रैंगिंग बंद हो जाएगी ?
क्या पुलिस और सरकार अब भी कोई कार्यवाही करेगी या सिर्फ लिपा-पोती कर के मामले को निपटा देगी!
आज हर माता-पिता को डर लगता है ये सब देखकर !
काश, किसी ने अनीता की बात पहले सुन ली होती, तो शायद अनीता आज हमारे बीच होती!
इस घटना से सभी बच्चे और माता-पिता सबक ले और अगर आपको कोई भी परेशानी है आपके स्कूल में या कॉलेज में तो आप अपने पेरेंट्स से इस बारे में बात करे उन्हें खुलकर बताये क्यूंकि उनसे बेहतर न तो कोई आपको समझ सकता है, और नाही कोई आपकी मदद कर सकता है.…।   

 

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