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नमस्कार दोस्तों। नाम तो आपने पढ़ ही लिया होगा। बाद बाकि पेशे से टीवी पत्रकार हूं और आजतक के साथ कार्यरत हूं। लिखना पसंद है। जो समझ आता है और लिखने लायक होता है लिख देती हूं। ना तो ज्ञानी हूं और ना ज्ञान बांटने के लिए लिखती हूं। बस कुछ सच्ची और काल्पनिक कहानीयां लिखती हूं। कभी कभी फिल्म समीक्षा तो नही पर फिल्म मेरी नजर से कैसी दिखती है वो लिख देती हूं। ब्लाॅग है जहां लिखने के लिए रोक टोक नही। इसलिए बेबाक लिखती हूं ।

Sunday, 5 January 2014

फिर उसकी याद आई....

जब आधी रात पूरी दुनिया सो रही थी, तब कोई जाग रहा था ! खुली आँखों से अपनी फूटी किस्मत पर रो रहा था! आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो साहिल उसे अचानक छोड़ चला गया! ना कुछ कहा, ना कुछ सुना! बस एक अंतिम सन्देश के साथ उसने विदाई दे दी!

"  डिअर राधिका,

मैं तुम्हे बहुत अच्छी तरह समझता हूँ, तुम जैसी लड़की बड़े नसीब वालो को ही मिलती है! यह मेरा सौभाग्य था, जो मैंने तुम्हे पाया! तुम हर तरह निपुण हो! तुम्हारा सौंदर्य अप्रतिम है! तुम्हारी हर बात मुझे अच्छी लगती है!
पर अब हमारा एक साथ होना नामुमकिन है! मैं ये शहर छोड़ कर हमेशा के लिए जा रहा हूँ! हो सके तो मुझे माफ़ कर देना!

तुम्हारा साहिल"

फिर वही सन्देश पढ़ते पढ़ते राधिका के आंसू निकल पड़े और अपनी किस्मत को कोसती हुई, यह सोचकर रोने लगी कि आखिर जब वह हर तरह से निपुण थी, तो साहिल ने उसे इस तरह क्यों छोड़ दिया!
कमरे की लाइट बुझाकर और अपने जीवन में भी अंधकार भर, कम्बल ओढ़कर वो अश्रुधारा की किसी और ही दुनिया में चली गई!


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