कल समाचार देखा ! देख कर आँखों में आंसू आ गए ! हमारे देश के जवानो की जो निर्मम हत्या हुई है, उसका हिसाब कौन देगा ?
इस सरकार से तो कोई उम्मीद ही नहीं की जा सकती की वो कोई कार्यवायी करे ! बस हम दुआ कर सकते है उन शहीदों के परिवारवालों के लिए !
एक बहन जो अपने भाई का इंतज़ार कर रही थी, की इस बार भाई रक्षाबंधन पर उसके साथ हो !
एक बेटा जो अपने पिता का इंतज़ार कर रहा था, की ना जाने इस बार उसे क्या तोहफा मिलेगा !
एक पत्नी जो अपने पति की प्रतीक्षा कर रही थी, की वो उसे सही सलामत देख सके !
एक माँ जो अपने बेटे को जी भर के देख लेना चाहती थी !
एक पिता जिसे अपने बेटे पर गर्व था, की वो देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाले हुए है !
और वो पूरा गाँव और समाज अपने उस वीर पुत्र की प्रतीक्षा कर रहा था !
पर उन्हें क्या मिला?
इस सरकार से तो कोई उम्मीद ही नहीं की जा सकती की वो कोई कार्यवायी करे ! बस हम दुआ कर सकते है उन शहीदों के परिवारवालों के लिए !
एक बहन जो अपने भाई का इंतज़ार कर रही थी, की इस बार भाई रक्षाबंधन पर उसके साथ हो !
एक बेटा जो अपने पिता का इंतज़ार कर रहा था, की ना जाने इस बार उसे क्या तोहफा मिलेगा !
एक पत्नी जो अपने पति की प्रतीक्षा कर रही थी, की वो उसे सही सलामत देख सके !
एक माँ जो अपने बेटे को जी भर के देख लेना चाहती थी !
एक पिता जिसे अपने बेटे पर गर्व था, की वो देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाले हुए है !
और वो पूरा गाँव और समाज अपने उस वीर पुत्र की प्रतीक्षा कर रहा था !
पर उन्हें क्या मिला?
एक लाश.…
जो की न कुछ बोल सकती थी, ना अपनी बहन से राखी बंधवा सकती थी, ना अपने माता-पिता के पैर छु कर आशीर्वाद ले सकती थी और नाही अपने बच्चे को कलेजे से लगा सकती थी!
ये सवाल देश के हर नागरिक का है की कब तक हम यूँ ही सहते रहेंगे ! कब तक छेलेंगे इस पीड़ा को ! आखिर सरकार कुछ करती क्यों नहीं है ?
अगर उस जवान की जगह उनका अपना बेटा होता, तो क्या वो यूँही चुप्पी साधे होते ? क्या बस इसी तरह राजनीती करते ?
अब और सहा नहीं जाता ये सब….बस आशा करती हूँ की इस घटना के बाद कुछ तो बदलाव आये हमारी सरकारी व्यवस्था में और अगली बार किसी जवान को इस तरह अपनी जान गवानी ना पड़े …
अगर उस जवान की जगह उनका अपना बेटा होता, तो क्या वो यूँही चुप्पी साधे होते ? क्या बस इसी तरह राजनीती करते ?
अब और सहा नहीं जाता ये सब….बस आशा करती हूँ की इस घटना के बाद कुछ तो बदलाव आये हमारी सरकारी व्यवस्था में और अगली बार किसी जवान को इस तरह अपनी जान गवानी ना पड़े …

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