आज बस कुछ पुराने दोस्त याद आ रहे है ! जो की मेरे संपर्क में नहीं है.…आज टेक्नोलॉजी के सहारे बहुत से बिछड़े दोस्त मिले, पर कुछ ऐसे भी है जिन्हें ढूँढना मुश्किल है ! क्यूंकि १० साल से भी ज्यादा का समय हो गया है ! किसी की शक्ल भी उतनी अच्छी तरह से याद नहीं है ! और कुछ एक की याद भी है तो बचपन की शक्ल जो की इस फैशन के दौर में पूरी तरह बदल गयी होगी ! उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है, पर भुलाना भी उतना ही कठिन है ! मेरी एक दोस्त थी सोनम, हम तीसरी से लेकर पाचवी तक साथ पढ़ा करते थे ! उससे मुझे कुछ ज्यादा ही लगाव था, क्यूंकि उसकी अपनी माँ नहीं थी और उसकी सौतेली माँ उसे बहुत परेशान करती थी ! इसलिये वो मेरे काफी करीब थी, वो बहुत ही सहमी सी, डरी सी रहती थी.… और मैं जो की
उस वक़्त क्लास की मॉनिटर हुआ करती थी उसे सबसे बचाती थी ! इसलिए हमारी बहुत बनती थी हम बहुत अच्छे दोस्त थे !
साथ में खाना, साथ में खेलना और घर भी साथ में ही जाना…लेकिन वो दिन मुझे आज भी याद हैं जब सोनम को पाचवी के बिच में ही स्कूल छोड़ के गाँव जाना पड़ा था ! सोनम के पापा आर्मी में थे ! और वो किसी लड़ाई में घायल हुए थे, उनके जीने की उम्मीद कम ही थी ! उनकी अंतिम इच्छा थी की अपनी बेटी को देख लेते ! मैंने भी सोचा की सोनम जा रही है पापा को देखकर लौट आएगी ! मुझे क्या पता था की वो मेरी और सोनम की आखिरी मुलाकात थी... इसके बाद दूसरा और फिर तीसरा सेमेस्टर चला गया पर अब तक सोनम का कोई अता पता नहीं था ! मैं रोज़ सोनम का इंतज़ार करती थी, पर एक दिन ऐसा आया जब मेरे सब्र का बाँध टुटा ! और मैं स्कूल से छुट कर सीधा सोनम के घर गयी ! जहा मैंने देखा उसकी सौतेली माँ सफ़ेद रंग के साड़ी में थी, ना तो मांग में सिन्दूर था और नाही हाथो में चूड़ियां, देख कर ही एहसास हो गया था, की कोई अनहोनी घटना घटी है ! उनसे मैंने पूछा की सोनम कहा हैं, उन्होंने कहा जब सोनम के पापा ही नहीं रहे तो सोनम यहाँ रह कर क्या करेगी ? उसे हम उसके नानजी के पास छोड़ आये है ! अब वो दुबारा यहाँ कभी नहीं आएगी !
ये सुनते ही मैं स्तब्ध रह गयी ! बहुत रोना आया पर मैं कुछ नहीं कर सकती थी ! मैंने उनसे हिम्मत कर के पूछा आंटी वहा का कोई नम्बर है आपके पास ? वो बोली नहीं उनके गाँव में टेलीफोन नहीं हैं! मैं चुप चाप निराश होकर घर लौट आयी ! मैंने माँ को सब बताया और माँ ने कहा वो जरुर आएगी ! सोनम मैं आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही हु! काश मैं तुमसे मिल पाती ! पता नहीं तुम अब कैसी दिखती होगी ! कितने बदलाव आये होंगे तुम में ! बस दुआ करती हु जहा भी हो सही सलामत हो….:)
उस वक़्त क्लास की मॉनिटर हुआ करती थी उसे सबसे बचाती थी ! इसलिए हमारी बहुत बनती थी हम बहुत अच्छे दोस्त थे !
साथ में खाना, साथ में खेलना और घर भी साथ में ही जाना…लेकिन वो दिन मुझे आज भी याद हैं जब सोनम को पाचवी के बिच में ही स्कूल छोड़ के गाँव जाना पड़ा था ! सोनम के पापा आर्मी में थे ! और वो किसी लड़ाई में घायल हुए थे, उनके जीने की उम्मीद कम ही थी ! उनकी अंतिम इच्छा थी की अपनी बेटी को देख लेते ! मैंने भी सोचा की सोनम जा रही है पापा को देखकर लौट आएगी ! मुझे क्या पता था की वो मेरी और सोनम की आखिरी मुलाकात थी... इसके बाद दूसरा और फिर तीसरा सेमेस्टर चला गया पर अब तक सोनम का कोई अता पता नहीं था ! मैं रोज़ सोनम का इंतज़ार करती थी, पर एक दिन ऐसा आया जब मेरे सब्र का बाँध टुटा ! और मैं स्कूल से छुट कर सीधा सोनम के घर गयी ! जहा मैंने देखा उसकी सौतेली माँ सफ़ेद रंग के साड़ी में थी, ना तो मांग में सिन्दूर था और नाही हाथो में चूड़ियां, देख कर ही एहसास हो गया था, की कोई अनहोनी घटना घटी है ! उनसे मैंने पूछा की सोनम कहा हैं, उन्होंने कहा जब सोनम के पापा ही नहीं रहे तो सोनम यहाँ रह कर क्या करेगी ? उसे हम उसके नानजी के पास छोड़ आये है ! अब वो दुबारा यहाँ कभी नहीं आएगी !
ये सुनते ही मैं स्तब्ध रह गयी ! बहुत रोना आया पर मैं कुछ नहीं कर सकती थी ! मैंने उनसे हिम्मत कर के पूछा आंटी वहा का कोई नम्बर है आपके पास ? वो बोली नहीं उनके गाँव में टेलीफोन नहीं हैं! मैं चुप चाप निराश होकर घर लौट आयी ! मैंने माँ को सब बताया और माँ ने कहा वो जरुर आएगी ! सोनम मैं आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही हु! काश मैं तुमसे मिल पाती ! पता नहीं तुम अब कैसी दिखती होगी ! कितने बदलाव आये होंगे तुम में ! बस दुआ करती हु जहा भी हो सही सलामत हो….:)

2 comments:
heading padhne ke baad laga...ye chokari mujhe jaanti hi kitna hai ki mujhe miss karne lagi...:p
dharya rakho balike !!! vo din bhi jarur aayega jab main tumhe miss karungi! or ek sonam ko khone ke baad dusri sonam ko paane sukh hi alag hai! tum nahi samjhogi :P
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